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Friday, 3 July 2015

Meet Sachin Tendulkar's daughter Sara

Like Father, like daughter. This saying fits well in the case of Sachin Tendulkar’s beautiful daughter Sara. No we are not hinting at Sara’s budding chances in the field of cricket but for attracting attention at a very young age. Just like her super famous dad, who was touted as a child prodigy who shook the cricketing world at the tender age of 16. Now, his gorgeous 17-year-old daughter Sara is gaining immense popularity with her elegance and style off the field. The beautiful member of Tendulkar clan is generating with those beautiful photographs shared on social platform and mushrooming number of Facebook fan pages dedicated to Sara.

Thursday, 2 July 2015

Where does your iPhone go to die? Read. And be afraid.

India is sitting on a ticking e-waste time bomb. Technology has never sold faster. Mobile phones, televisions, laptops, tablets. Everyone across social and geographic strata is getting wired.
Technology, they say, will even save the environment.
But the dark side of the growth story has just begun to reveal itself. We are facing the onset of an unprecedented tsunami of electronic waste.
To say that discarded electronic appliances - if not recycled properly - can lead to pollution, toxicity, environmental damage and complications in human health would be an understatement.
As people go through electronics faster and faster, the problem gets harder to solve.
So what's the scale of India's e-waste? It's a scary answer.
Here's what the numbers say:

1641,metric kilo tonnes
  • That's how much e-waste was generated in India in 2014
  • That's nearly four times the weight of the Empire State Building - a 102-storey skyscraper
  • 70% of that mountain of e-waste is contributed by the public and private industrial sectors
  • This contains over 1,000 different substances that are toxic - lead, arsenic, mercury and cadmium to name a few
  • E-waste typically includes computer monitors, LCDs, air-conditioners, fridges, mobile phones, chargers, cathode rays tubes, motherboards etc

500%
  • The predicted increase of e-waste from televisions in India by 2020, according to a Rajya Sabha report
  • Iron and steel make up 50% of e-waste from TVs; plastics account for around 21%
  • Computers, televisions and mobile phones are the most dangerous. They have the maximum levels of cadium, lead and mercury and are discarded most often
  • Individual households account for around 15% of India's e-waste




सगे भाई ने किया वो काम जो बहन सपने में भी नहीं सोच सकती

छिंदवाड़ा। बिछुआ थाना क्षेत्र के ग्राम घाटकामठा में मंगलवार दरमियानी रात भाई ने भाई की कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने सोमवार हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि मामूली बात पर भाई ने कुल्हाड़ी से सिर और गर्दन पर वार किए जिससे उसकी मौत हो गई।
बिछुआ थाना प्रभारी एमपी श्रीवास्तव ने बताया कि शिवराज (22) पिता पतिराम धुर्वे और बडे़ भाई शिवपाल (24) के बीच मंगलवार रात करीब एक बजे विवाद हुआ जिसके बाद शिवराज ने घर के अन्दर से कुल्हाड़ी निकाली और शिवपाल के सिर, गर्दन पर वार किए जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पतिराम (55) पिता भिकारी धुर्वे की रिपोर्ट पर पुलिस ने सोमवार आरोपी शिवराज के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत अपराध कायम कर हिरासत में लिया।
शिवपाल कोई भी काम नहीं करता था जिसके चलते मंगलवार दोपहर दोनों भाइयों के बीच मामूली विवाद हुआ, जिसके बाद पिता पतिराम ने भी शिवपाल को फटकारा। देर रात इसी बात को लेकर दोबारा विवाद हुआ जिसने बड़ा रूप लिया और शिवराज ने कुल्हाड़ी से अपने सगे भाई की हत्या कर दी। थाना प्रभारी श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुवार हत्या के आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

Wednesday, 1 July 2015

EXPOSED: 21 FAKE universities operating across India; check out complete list here

New Delhi: Putting out an alert, the University Grants Commission (UGC) has released a list of 21 "fake" universities and warned the students to refrain from enrolling in such institutions.

In a notification issued on Wednesday, the UGC has listed 21 "fake" universities - eight in Uttar Pradesh, six in Delhi and one each in Tamil Nadu, Karnataka, Bihar, Kerala, Madhya Pradesh, Maharashtra and West Bengal.

"Students and public at large are informed that such 21 self-styled and unrecognized institutions, functioning under the contravention of the UGC Act are declared as fake, and are not entitled to confer any degrees further," said the apex body for higher education in its notice.

According to the UGC Act, 1956, only a university established by the Central/State/Provincial Act or an institution deemed to be university under Section 3 of the Act is allowed to call themselves as university.

Therefore, any institution that does not comply with the above rule is prohibited from using the term 'university' under Section 23 of the Act.

Check out the complete list of fake universities released by UGC.

Bihar

Maithili University/Vishwavidyalaya Darbhanga Bihar


Delhi

Varanaseya Sanskrit Vishwavidyalaya. Varanasi, UP and Jagatpuri Delhi

Commercial University Ltd, Daryaganj Delhi

United Nations University, Delhi

Vocational University, Delhi

Indian Institution of Science and Engineering, New Delhi

ADR-Centric Juridical University, Gopala Tower, Rajendra Place, New Delhi



Karnataka

Badaganvi Sarkar World Open University, Education Society, Gokak Belgaum (Karnataka)



Kerala

St.John's University, Kishanattam, Kerala



Madhya Pradesh

Keserwani Vidyapith, Jabalpur, Madhya Pradesh


Maharashtra

Raja Arabic University, Nagpur


Tamil Nadu

D.D.B. Sanskrit University, Putur, Trichi


West Bengal

Indian Institute of Alternative Medicine, 80, Chowringhee Road, Kolkata


Uttar Pradesh

Mahila Gram Vidyapith/Vishwavidyalaya, Prayag, Allahabad

Gandhi Hindi Vidyapith, Prayag, Allahabad

National University of Electro Complex Homeopathy, Kanpur

Netaji Subhash Chandra Bose University (Open University), Achaltal, Aligarh

Uttar Pradesh Vishwavidyalaya, Kosi Kalan, Mathura, Uttar Pradesh

Maharana Pratap Shiksha Niketan Vishwavidyalaya, Pratapgarh

Indraprastha Shiksha Parishad, Institutional Area, Khoda, Makanpur, Noida Phase II

Gurukul Vishwavidyalaya, Vrindavan, UP

यूजनी बुचार्ड के पहनावे ने तोडा विंबलडन का कानून

दन। पहले ही दौर से हारकर वर्ष के तीसरे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विंबलडन से बाहर हो चुकीं कनाडा की टेनिस स्टार यूजनी बुचार्ड टूर्नामेंट के ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के बावजूद दंडित होने से बच गई। 

पिछले वर्ष फाइनल तक का सफर तय करने वाली बुचार्ड मंगलवार को हुए महिला एकल वर्ग के पहले दौर के मैच में चीन की यिंग यिंग डुआन के हाथों उलटफेर का शिकार हुईं।

मैच रेफरी लुइस एंगजेल ने 12वीं विश्व वरीयता प्राप्त टेनिस सुंदरी बुचार्ड की पोशाक का निरीक्षण किया, हालांकि उन्हें दंडित नहीं किया। विंबलडन ड्रेस कोड के अनुसार खिलाडियों को पूरी तरह सफेद वस्त्रों में ही कोर्ट पर खेलने के लिए उतरना होता है। बुचार्ड हालांकि काले रंग की ब्रा पहनकर यह मैच खेलने उतरी थीं और मैच के दौरान उनके ब्रॉ की स्ट्रिप आसानी से दिखाई दे रही थी। 
बुचार्ड से जब पूछा गया कि क्या क्या उन्हें पता था कि उनकी ब्रा स्ट्रैप के कारण उन्हें परेशानी हो सकती थी तो बुचार्ड ने कहा, मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी और मुझे किसी ने भी मेरी ब्रा को लेकर कुछ भी नहीं कहा।

by Patrika

मिस्र में सैन्य चौकियों पर आतंकी हमले, 60 जवानों की मौत

काहिरा (1 जुलाई) : मिस्र के अशांत सिनाई प्रायद्वीप में आतंकवादियों ने सेना की अलग-अलग चौकियों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों में कम से कम 60 सैनिकों के मारे जाने की ख़बर है। हमलों में आत्मघाती हमलावरों और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
मिस्र के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सेना और पुलिस ने हमलावरों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान छेड़ा है। ज़मीन पर कार्रवाई के साथ विमानों का भी सहारा लिया जा रहा है।
नार्थ सिनाई के शेख जुवैद शहर में आंतकी हमलों में आत्मघाती कार बमों और हथियारों से सुरक्षा चौकियों को भारी नुकसान पहुंचा।
दो दिन पहले ही मिस्र के महाभियोजक हिशाम बरकत की एक कार बम हमले में की हत्या कर दी गई थी। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी ने एक दिन पहले आतंकवादियों के सफाये के लिए बड़ा अभियान चलाने की बात कही थी। जनवरी 2011 में पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को क्रांति के जरिए सत्ता से बेदखल किये जाने के बाद मिस्र में नार्थ सिनाई में कई हिंसक हमले हो चुके हैं।

केजरीवाल सरकार में कुछ नहीं बदला, वैसे ही हैं समस्याएं


नई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऑटोरिक्शा ड्राइवर विनोद कुमार ने बड़े उत्साह से अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था। भ्रष्टाचार खत्म करने और जरूरी बिलों को कम करने के वादों पर आम आदमी पार्टी शानदार बहुमत के साथ सत्ता में भी आई। केजरीवाल के सत्ता में आए चार महीने हो गए लेकिन विनोद की समस्या खत्म नहीं हुई। दिल्ली के तपते जून में 47 साल के विनोद ने कहा, 'कुछ भी नहीं बदला है'।

विनोद ने कहा, 'उन्होंने मुफ्त में पानी का वादा किया था लेकिन हमलोग गर्मी में पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। हमलोग चाहते हैं कि केजरीवाल केवल दिल्ली पर ध्यान दें न कि अपना वक्त राजनीति में गंवाएं।'

इसी साल फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटों पर जीत मिली थी। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चलाने वाले केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।

केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को बुरी तरह से हरा दिया। पिछले साल हुए आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली हार थी। केजरीवाल की छवि जमीन से जुड़े लोगों के बीच रहने वाले नेता के रूप में बनी थी। वह अपने ट्रेडमार्क मफलर पर एक व्यंग्यात्मक टेलिविजन शो में आने पर भी राजी हुए। लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही हफ्ते बाद आम आदमी पार्टी राजनीतिक मुक्केबाजी में लग गई। पार्टी बेमतलब के दावे करने लगी कि वह दूसरों से अलग है।

फर्जी डिग्री के मामले में केजरीवाल को अपने दूसरे कार्यकाल में कानून मंत्री से हाथ धोना पड़ा। जब सफाई कर्मचारी सैलरी नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर गए तो नए मुख्यमंत्री केजरीवाल समस्याओं से घिर गए। बदबूदार कूड़ों का सड़क पर ढेर लग गया। सुनील उन हजारों में से एक हैं जिन्होंने केजरीवाल को वोट किया था। उनका कहना है, 'मैंने केजरीवाल को इसलिए वोट दिया था कि वह राजनीति से पहले पब्लिक को तवज्जो देंगे। सुनील का कहना है कि केजरीवाल के पहले कुछ महीने बेहद निराशाजनक रहे हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार का नाम केवल विवादित खबरों में आया और उन्होंने हमारे लिए कुछ भी नहीं किया।

दिल्ली के सफाईकर्मियों की हड़ताल से उपजी समस्या को सुलझाने में केजरीवाल नाकाम रहे। ऐसा इसलिए कि सिविक बॉडी पर बीजेपी का कब्जा है। दिल्ली को स्पेशल स्टेटस मिला है। यह पूर्ण राज्य नहीं है। ऐसे में कई अहम ताकतों पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। इनमें पुलिस भी शामिल है। ऐसे में सिविक बॉडी पर किसी दूसरी पार्टी का नियंत्रण होने से दिल्ली सरकार की परेशानी और जटिल हो जाती है। इस हालत में किसी को राजनीति मोहरा बनाना और आसान हो जाता है।

चुनाव बाद केजरीवाल से प्रधानमंत्री मोदी ने भरपूर समर्थन देने का वादा किया था। लेकिन इनकम टैक्स ऑफिसर से राजनीतिक कैंपेनर बने केजरीवाल ने बीजेपी पर दिल्ली में काम नहीं करने देने के गंभीर आरोप लगाए। केजरीवाल ने एनडीटीवी से कहा था, 'बीजेपी दिल्ली में चुनाव हारने के बाद से बदला लेना चाहती है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है।'

राजनीति का बड़ा केंद्र मुख्यमंत्री के रूप में यह केजरीवाल का दूसरा कार्यकाल है। पहला टर्म इनका दिसंबर 2013 में शुरू हुआ था और राष्ट्रीय राजनीति में धमाका करने की आकांक्षा के साथ इन्होंने 49 दिनों में ही इस्तीफा दे दिया था। केजरीवाल का यह कदम आत्मघाती साबित हुआ। पिछले साल हुए आम चुनाव में आम आदमी पार्टी हाशिए पर चली गई। केजरीवाल ने मोदी को बनारस जाकर चुनौती दी लेकिन वह फिर से दिल्ली लौटने पर मजबूर हुए।

राजनीतिक एक्सपर्ट समीर सरन का मानना है कि केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से कड़वी प्रतिद्वंद्विता को पर्याप्त जगह दी। ऐसा प्रभुत्व के लिए किया गया लेकिन इसका नुकसान दिल्ली के लोगों का हो रहा है। दिल्ली स्थित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर रिसर्च फेलो समीर सरन का मानना है कि पिछले कुछ महीनों को केजरीवाल ने व्यर्थ टकराव में गंवाया। उन्होंने कहा कि जहां काम होने चाहिए थे वहां राजनीति का बड़ा अड्डा बन गया। केजरीवाल श्रेष्ठ बन सकते थे लेकिन उन्होंने खुद को भटकाया।
केजरीवाल सरकार ने पिछले महीने बजट के जरिए अपने समर्थकों को साधने की कोशिश की है। दिल्ली सरकार ने सोशल सर्विस पर बजट का हिस्सा बढ़ाया। गरीबों के लिए पानी और बिजली पर भी सब्सिडी दी। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह बजट आम आदमी का है और हमने कोशिश की है कि दिल्ली के लोगों की जरूरतें और हसरतों को छू पाऊं। हालांकि दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित का कहना है कि केजरीवाल सरकार न तो गवर्नेंस को समझना चाहती है और न ही समझ रही है।

15 सालों तक दिल्ली की सीएम रहने वाली शीला दीक्षित ने कहा, 'यहां तक कि हमलोग के भी दूसरी अथॉरिटीज से मतभेद होते थे लेकिन हमलोग इसे आंदोलन और शोर के जरिए नहीं सुलझाते थे।' आप समर्थक और दिल्ली के इलेक्ट्रिशन राजू सिंह ने कहा, 'केजरीवाल ने अभी तक शहर की जरूरत और प्रतिबद्धता के हिसाब से प्रदर्शन नहीं किया है। हालांकि राजू का कहना है कि वह पारंपरिक राजनेताओं के मुकाबले अच्छे हैं। राजू ने कहा, 'हमलोग उनका समर्थन करते हैं और उम्मीद है कि वह यहां रहकर बदलाव लाएंगे।