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Wednesday, 1 July 2015

एक रूपये के नोट का बड़ा खुलासा

एक रुपए का नोट तैयार करने का खर्च एक रुपये 14 पैसे




नई दिल्ली 
वित्त मंत्रालय ने 1 रुपए का नोट फिर से शुरू किया, जिसके बाद नोट की लागत1.14 रुपए बैठ रही है।आरटीआई से यह अहम जानकारी सामने आई है। 

आरटीआई ऐक्टिविस्ट सुभाष अग्रवाल ने भारत प्रतिभूति मुद्रणालय तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड में आरटीआई डालकर जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में बताया गया है कि नोट की लागत 1.14 रुपए आ रही है। 

मुद्रणालय की ओर से कहा गया कि इस नोट को उसने वर्ष 2014-15 के दौरान फिर से छापना शुरू किया जिस पर 1.14 रुपए प्रति नोट की लागत आ रही है। हालांकि एक रुपए के नोट को पहले 1994 में बंद कर दिया गया था।


उस दौरान भी ज्यादा लागत को वजह बताया गया था। 1995 में इसी वजह से दो और पांच रुपये के नोट भी बंद कर दिए गए थे। वित्त मंत्रालय ने 6 मार्च 2015 को एक रुपए का नोट फिर से लॉन्च किया था, अब फिर से सरकार को ज्यादा लागत की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है।

अब कम अंक वाले छात्रों को भी मिलेगा डीयू में एडमिशन.........!

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिले के लिए ऊंची कट ऑफ से 70-75 फीसदी अंक लाने वाले छात्रों को निराश होने की जरूरत नहीं है और उनके लिए मौके खत्म नहीं हुए हैं, पर उन्हें मनमाफिक कॉलेजों की बजाए इवनिंग कॉलेजों में ही स्थान मिल सकता है।
डीयू के शिक्षकों का मानना है कि आने वाली कट ऑफ की सूची में बाहरी कॉलेजों और इवनिंग कॉलेजों  में कटऑफ में कमी आ सकती है। ऐसे में हिन्दी, इतिहास और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में 70-75  फीसदी अंक लाने वाले छात्रों को भी दाखिला मिल सकता है। इसके अलावा छात्रों के पास कुछ कॉलेजों में  बीए प्रोग्राम में भी दाखिला प्राप्त करने का मौका है।
 
गौरतलब है कि डीयू ने अब तक अपनी दो कट ऑफ सूचियां जारी की हैं, जो ज्यादातर कॉलेजों में 90  फीसदी से ऊपर ही बनी हुई है। रामलाल आनंद कॉलेज में प्रोफसर डॉ. नीलम ऋषिकल्प ने कहा कि कम अंक लाने वाले छात्रों के लिए  भी डीयू में दाखिला लेने की उम्मीद है। उन्हें इवनिंग कॉलेजों में दाखिला मिल सकता है।
 
उन्होंने कहा कि 70-75 फीसदी अंक लाने वाले छात्रों को कॉमर्स के विषयों में तो दाखिला नहीं मिल पाएगा, लेकिन हिन्दी ऑनर्स और इतिहास ऑनर्स में दाखिला मिलने की उम्मीद है। डॉ. नीलम ने कहा कि 75 फीसदी से थोड़ा ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों को बीए प्रोग्राम में भी दाखिला मिल सकता है, लेकिन इसके लिए पैमाना अलग-अलग कॉलेजों में अलग-अलग होगा।
 
दूसरी ओर, रामानुज कॉलेज में हिन्दी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुपम ने कहा कि आने वाली  कटऑफ सूची में कमी आने की उम्मीद है और छात्रों को बाहरी कॉलेजों में हिन्दी ऑनर्स और इतिहास  ऑनर्स में दाखिला मिल सकता है और हिन्दी ऑनर्स में आखिर तक कट ऑफ आएंगी।
 
डीयू में अब तक जारी की गई दो कटऑफ में डीयू के नामी कॉलेजों में 90 फीसदी से ज्यादा अंक लाने  वाले छात्र ही दाखिले की दौड़ में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा छात्रों में नॉर्थ कैम्पस के कॉलेजों में  दाखिला लेने को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
 
डॉ. अनुपम ने कहा कि कुछ कॉलेजों में राजनीतिक विज्ञान में भी छात्रों को दाखिला मिलने की उम्मीद है जिसमें कटऑफ घटकर 75 प्रतिशत तक चली जाती है, इतिहास ऑनर्स में भी 70.75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को दाखिले की उम्मीद है।
 
उन्होंने कहा कि संध्या कॉलेजों में बीए प्रोग्राम में भी कटऑफ 75 प्रतिशत तक जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बाहरी कॉलेजों (उत्तर परिसर के बाहर) जैसे शिवाजी, श्रद्धानंद, श्यामलाल, अरबिंदो और  मोतीलाल नेहरू (संध्या) कॉलेजों में छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बाकी है। डॉ. नीलम ने कहा कि आजकल छात्र मॉर्निंग और इवनिंग कॉलेजों में फर्क नहीं करते हैं और इवनिंग  कॉलेजों में दाखिला ले लेते हैं।

Tuesday, 30 June 2015

दो चाचाओं ने मिलकर लूटी भतीजी की इज्ज्त ...........

पाकबड़ा। क्षेत्र के करनपुर गांव में दो सगे चाचाओं ने अपने रिश्ते को शर्मसार करते हुए अपनी सगी भतीजी की ईज्जत को तार-तार कर दिया। पीड़ित भतीजी ने दोनों आरोपी चाचाओं के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दी है। पुलिस ने मामले की जांच में ले लिया है।
जानकारी के अनुसार पीड़ित किशोरी रात को अपनी मां के साथ घर के बाहर सो रही थी, कि देर रात को दोनों चाचा दबे पांव आए और किशोरी को उठाकर कमरे में ले गए। जहां उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया तभी किशोरी की आंख खुल गई और उसने शोर मचा दिया। आरोपी धमकी देकर फरार हो गए।
पाकबड़ा एसओ ओमकार सिंह ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच तीन माह पहले जमीन को लेकर विवाद हो गया था। मामले की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
- By PAtrika

.कोल्ड ड्रिंक पीने वाले हो जाएं सावधान....................!

नई दिल्‍ली (29 जून):अगर आप निंरतर कोल्‍ड ड्रिंक का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद ही जरूरी हो सकती है। क्‍योंकि हार्वर्ड विवि में किए गए एक सर्वे में इस बात की पुष्टि हुई हैं कि कोल्ड ड्रिंक पीने से डायबिटीज, हृदय रोग तथा शरीर में गांठें बनने का खतरा बढ़ जाता है।
कोल्ड ड्रिंक का कोई भी स्वास्थ्यकारी लाभ मनुष्य की सेहत पर नहीं होता। किसी भी कोल्ड ड्रिंक कंपनी ने भी अब तक किसी कोल्ड ड्रिंक से स्वास्थ्य पर होने वाले फायदों का दावा नहीं किया है। एक 300 एमएल की कोल्ड ड्रिंक बोतल में 40 ग्राम चीनी होती है। इसको पीने के बाद व्यक्ति की रोजाना की अतिरिक्त चीनी की आवश्यकता लगभग दो गुना तक पूरी हो जाती है। इसके बाद व्यक्ति जो भी चीनी लेता है, उससे नुकसान ही होता है। साथ ही इन पेय पदार्थों में कैफीन भी होता है।
चीनी और कैफीन दोनों हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसान देह हैं। इसमें ड्रिंक तो है नहीं बस ये तो कोल्ड और शुगर ही है। अगर कोई 250 एमएल कोल्ड ड्रिंक पी लेता है तो उसकी लगभग दिनभर की शुगर की जरूरत पूरी हो जाती है। फिर जब वह कुछ भी मीठा खाएगा तो उसके तो नकरात्मक असर होने ही हैं। जबकि अगर हम लागत के पैमाने पर देखें तो यह लगभग 100 एमएल दस रुपये में आता है। जबकि इसमें लागत के नाम पर चीनी, पानी और कैफीन के अलावा कुछ भी नहीं आता। जहां इन कंपनियों प्लांट होते हैं वहां ये जमीन से पानी निकालते हैं। शिकंजी, लस्सी और जूस आदि तमाम स्वास्थ्यकारी विकल्प उपलब्ध है।

दृश्यम के लिए इसलिए चुना अजय देवगन को........!


बॉक्सर मेवेदर की फरारी बिकाऊ.......!

जबसे अमेरिकन बॉक्सर मेवेदर ने अपनी लिमिटेड एडिशन कार फरारी एन्जो बेचने की घोषणा की है, दुनिया भर के रईसों में इसे खरीदने की होड़-सी मच गई है। और यह भी तब, जब इस कार की कीमत करीब 24 करोड़ रुपये आंकी गई है।

इस तरह की दुनिया में ज्यादा से ज्यादा 400 कारें मौजूद है। फरारी एन्जो को फॉर्म्युला 1 टेक्नॉलजी का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।

यह दो-सीटर कार 2002 में लॉन्च हुई थी। इस कार में 5998सीसी का वी12 इंजन लगा है, जिससे 660एचपी की पावर पैदा होती है।
यह शानदार कार 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार सिर्फ 3.65 सेकंड्स में पा लेती है। फरारी एंजो की टॉप स्पीड 350 किमी/घंटा है।
कार की डिजाइन भी काफी इनोवेटिव है और इस कार को परफॉर्मेंस बेस्ड बनाया गया है। यही वजह रही कि कंपनी ऐसी जबर्दस्त कार बनाने में सफल हुई।
इस कार के फ्रंट को फॉर्म्युला 1 कारों के नोज कोन से प्रेरणा लेकर बनाया गया है।
इस कार को थोड़ा हल्का और कॉम्पैक्ट साइज में बनाया गया है। इसके स्टीयरिंग वील में कार्बन-फाइबर की सतह लगाई गई है। यहां तक की रेसिंग सीट का स्ट्रक्टर भी कार्बन फाइबर से बनाया गया है।

इस कार की बैकरेस्ट और सीट साइज राइडर के बॉडी साइज के हिसाब से फिट हो जाती हैं। इस तरह से ड्राइवर को मिलती है पर्फेक्ट ड्राइविंग पजीशन।

'शहीद बनने के लिए इंदिरा ने की थी व्यवस्थित आत्महत्या'......!

नवनीतलाल शाह के मुताबिक इंदिरा गांधी ने 'व्यवस्थित आत्महत्या' क्यों की थी, फोटो पर क्लिक करके जानें...
अहमदाबाद

गुजरात हाई कोर्ट ने एक ऐसी याचिका रद्द कर दी है, जिसमें 1984 में हुई देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को एक 'व्यवस्थित आत्महत्या' करार दिए जाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि इंदिरा अपने बेटे राजीव गांधी को अगला पीएम बनाना चाहती थीं और इसलिए उन्होंने पूरे प्लान के साथ आत्महत्या की थी।

रोचक बात यह है कि यह याचिका 1986 में दायर की गई थी और तब से इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई थी। सोमवार को इस याचिका पर पहली बार सुनवाई हुई और चीफ जस्टिस वीएम सहाय और जस्टिस आरपी धोलारिया की बेंच ने इसे खारिज कर दिया। इस मामले को भुला दिया गया था। यहां तक कि सरकारी वकील के पास भी इस याचिका की कॉपी नहीं है।

घटलोडिया के निवासी नवनीतलाल शाह ने जस्टिस दवे कमिशन से इंदिरा गांधी की हत्या को आत्महत्या करार दिए जाने की मांग की थी। इंदिरा गांधी के हत्याकांड को व्यापक स्तर पर देखने वाले शाह के मुताबिक इंदिरा गांधी जानती थीं कि उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते वह अगले चुनाव में भाग नहीं ले पाएंगी।

शाह मानते हैं कि इंदिरा पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो की तरह सजा मिलने से बचना चाहती थीं। ऐसे में उनकी राजनीतिक ताकत के स्वाभाविक उत्तराधिकारी राजीव गांधी ही थे और इंदिरा उन्हें इसी तरह से राजनीति में लाना चाहती थीं। शाह अपनी इस दलील को कई अदालत और सरकारी अधिकारियों के सामने पेश कर चुके हैं।

पिछले तीन दशकों से शाह के ठिकाने के बारे में कोर्ट को जानकारी नहीं है और याचिका दायर करने के बाद शाह कभी इस याचिका की सुनवाई की अर्जी लेकर भी अदालत नहीं आए। शाह की याचिका में कहा गया है कि इंदिरा ने 'शहीद' का तमगा हासिल करने के लिए यह पूरा मामला रचा था। इससे उनके बेटे राजीव को लोगों की सहानभूति मिल जाती कि उनकी मां ने 'देश के लिए बलिदान' दिया। इस याचिका को खारिज कर दिया गया है।
by NBT